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एक्शन ऐड एक अंतर्राष्ट्रीय गरीबी विरोधी संस्था चालीस से अधिक देशों में गरीबी और असमानता को खत्म करने में गरीब लोगों का तरफदारी ले रही है | हमारा विश्वास है की निरंतर असमानता और अन्याय में सेंध लगाने लिए, गरीबी के मूल कारणों से निपटना होगा , न के सिर्फ़ कठिन हालातों से | उन्नति के लिए हमारा एक अधिकार आधारित दृष्टिकोण है, लोगों को अपने अधिकार प्रतिपादित करने में सहायता करना जो की संवैधानिक, नैतिक या कानूनी हों | यह तात्कालिक ज़रूरतों जैसे आहार, चिकित्सा, आश्रय और शिक्षा के अतिरिक्त है |
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प्रिय पाठक, मई, २००८
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारत का अगाध इतिहास एक भीषण मातृ मृत्यु दर से इंकित है | केन्द्र सरकार के ६० से भी अधिक सालों के सार्वजनिक स्वस्थ्य को प्रभावित करने वाले पञ्चवर्षीय योजनाओं पर केंद्रित, राज्यों के साथ समंवयपूर्ण नियोजन, और प्रायोजित मुख्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रयास, अब हमारे पीछे हैं |
२००० तक सबको स्वस्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए १९८३ में राष्ट्रिय स्वास्थ्य नीति समर्पित की गई थी | राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में स्वस्थ्य की देखभाल पर खर्च में अन्तर के साथ ( बिहार में रु. १३ प्रति व्यक्ति से लेकर हिमाचल प्रदेश में रु. ६०), ऐसे व्यय से निर्धारित लक्ष्य नही प्राप्त किए हैं | १९८० के दशक में सरकारी स्वस्थ्य देखभाल खर्च क्रमाशः बढ़ा, जबकि कुल सरकारी खर्च में स्वस्थ्य देखभाल खर्च का हिस्सा घटा | इसी अवधि में, निजी क्षेत्र का स्वस्थ्य देखभाल खर्च सरकारी खर्च से लगभग १.५ गुना अधिक था |
मानव अधिकार के दृष्टिकोण का प्रयोग स्वस्थ्य के अधिकार के लिए, एक मूल अधिकार, एक न्यूनतम सीमा जिससे नीचे समाज का कोई सदस्य नही गिर सकता, न केवल संरक्षण से तृप्ति की ओर मोड़ देगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी के अधिकार सार्वलौकिक हैं | इस माह राइट्स फ़र्स्ट स्वस्थ्य के अधिकार की प्राप्ति लिए विधिगत ढांचा और इसकी अंतर्राष्ट्रीय मान्यता का निरीक्षण करेगा |

- राइट्स फ़र्स्ट सम्पादकीय मंडल

 

स्वस्थ्य के अधिकार के लिए एक भारतीय विधि ढांचा
भूरे आयोग ने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया कि प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा बुनियादी अधिकार है जिसे इस आधार पर नही नकारा जन चाहिये कि लोग पैसे नही चुका सकते या किसी अन्य सामाजिक-आर्थिक कारण से . . .
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स्वस्थ्य के अधिकार को एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान
आनंद शंकर झा और ऋषि ठाकुर भूमिगतजल संपदा के संरक्षण के बारे में लिखते हैं
हाल ही में आए न्यायिक फैसलों में ये स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नितल भूमिगत जल सार्वजनिक धरोहर के
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